Saturday, October 13, 2018

#MeToo: क्या हिंदी और क्षेत्रीय मीडिया में महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न नहीं होता

 कहानी है 'गांव कनेक्शन' अख़बार में काम करने वाली रिपोर्टर नीतू सिंह की. ये नीतू के करियर के शुरुआती दौर की बात है.
आज महिलाएं ग्राउंड ज़ीरो से मौक़ा-ए-वारदात का आंखों देखा हाल लोगों तक पहुंचा रही हैं. बलात्कार और यौन शोषण पीड़िताओं को इंसाफ़ दिलाने के लिए उनकी आवाज़ बनकर ब्रेकिंग न्यूज़ और अख़बारों की सुर्खियों में छा रही हैं.
लेकिन, लेकिन, लेकिन...
लेकिन वही महिलाएं न्यूज़रूम में अपने साथ होने वाले यौन उत्पीड़न पर ख़ामोश हैं.
यही वजह है कि पिछले कुछ हफ़्तों से जब न्यूज़रूम्स के भीतर से एक के बाद #MeToo यानी महिलाओं के यौन उत्पीड़न की कहानियां सामने आ रही हैं और उन्हें पढ़ने वालों की आंखें फटी की फटी रह जा रही हैं.
न्यूज़रूम्स के भीतर से आने वाली इन #MeToo की कहानियों में एक बात ग़ौर करने वाली है. अब तक सामने आई ज़्यादातर कहानियां अंग्रेज़ी मीडिया से हैं. कहानी है 'गांव कनेक्शन' अख़बार में काम करने वाली रिपोर्टर नीतू सिंह की. ये नीतू के करियर के शुरुआती दौर की बात है.
आज महिलाएं ग्राउंड ज़ीरो से मौक़ा-ए-वारदात का आंखों देखा हाल लोगों तक पहुंचा रही हैं. बलात्कार और यौन शोषण पीड़िताओं को इंसाफ़ दिलाने के लिए उनकी आवाज़ बनकर ब्रेकिंग न्यूज़ और अख़बारों की सुर्खियों में छा रही हैं.
लेकिन, लेकिन, लेकिन...
लेकिन वही महिलाएं न्यूज़रूम में अपने साथ होने वाले यौन उत्पीड़न पर ख़ामोश हैं.
यही वजह है कि पिछले कुछ हफ़्तों से जब न्यूज़रूम्स के भीतर से एक के बाद #MeToo यानी महिलाओं के यौन उत्पीड़न की कहानियां सामने आ रही हैं और उन्हें पढ़ने वालों की आंखें फटी की फटी रह जा रही हैं.
न्यूज़रूम्स के भीतर से आने वाली इन #MeToo की कहानियों में एक बात ग़ौर करने वाली है. अब तक सामने आई ज़्यादातर कहानियां अंग्रेज़ी मीडिया से हैं.

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